श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.168.43 
तत: स गौतमगृहं प्रविवेश द्विजोत्तम:।
गौतमश्चापि सम्प्राप्तस्तावन्योन्येन संगतौ॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
घूमते-घूमते वह श्रेष्ठ ब्राह्मण गौतम के घर पहुँचा और इतने में ही गौतम भी शिकार से लौटकर वहाँ आ पहुँचा। दोनों की भेंट हुई ॥43॥
 
Wandering about, that great Brahmin reached Gautam's house, and in the meantime Gautam also reached there after returning from hunting. Both of them met each other. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)