Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.168.39-40: तत्पश्चात् एक दिन उस गाँव में एक और ब्राह्मण आया, जो जटाधारी, मृगछाला और जटाधारी था। वह स्वाध्याय में तत्पर, शुद्ध, विनम्र, नियमपूर्वक भोजन करने वाला, ब्राह्मणभक्त और वेदों का जानकार था। | mahabharat अध्याय 12.168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् एक दिन उस गाँव में एक और ब्राह्मण आया, जो जटाधारी, मृगछाला और जटाधारी था। वह स्वाध्याय में तत्पर, शुद्ध, विनम्र, नियमपूर्वक भोजन करने वाला, ब्राह्मणभक्त और वेदों का जानकार था।
Thereafter, one day another Brahmin came to that village who had matted hair, bark and deerskin. He was devoted to studies, pure, humble, ate according to rules, was a devotee of Brahmins and was well versed in the Vedas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥