Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.168.36-37: उसका नाम गौतम था। वह बड़ी लगन से बाण चलाने और लक्ष्य भेदने का अभ्यास करता था। हे राजन! गौतम भी डाकू की तरह जंगल में घूम-घूमकर हंसों का शिकार करने लगा था। वह हिंसा करने में बहुत कुशल था। उसमें ज़रा भी दया नहीं थी। वह हमेशा जानवरों को मारने की ताक में रहता था। | mahabharat अध्याय 12.168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बाणवेधे परं यत्नमकरोच्चैव गौतम:।
चक्राङ्गान् स च नित्यं वै सर्वतो वनगोचरान्॥ ३६॥
जघान गौतमो राजन् यथा दस्युगणास्तथा।
हिंसापटुर्घृणाहीन: सदा प्राणिवधे रत:॥ ३७॥
अनुवाद
उसका नाम गौतम था। वह बड़ी लगन से बाण चलाने और लक्ष्य भेदने का अभ्यास करता था। हे राजन! गौतम भी डाकू की तरह जंगल में घूम-घूमकर हंसों का शिकार करने लगा था। वह हिंसा करने में बहुत कुशल था। उसमें ज़रा भी दया नहीं थी। वह हमेशा जानवरों को मारने की ताक में रहता था।
His name was Gautam. He practised shooting arrows and hitting the target with great diligence. O King! Gautam also started hunting swans by roaming around in the forest like a bandit. He was very skilled in violence. He had no mercy. He was always on the lookout for killing animals.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥