तत्र दस्युर्धनयुत: सर्ववर्णविशेषवित्।
ब्रह्मण्य: सत्यसंधश्च दाने च निरतोऽभवत्॥ ३१॥
अनुवाद
उस गाँव में एक धनी डाकू रहता था, जो सभी जातियों की विशेषताओं को जानता था। उसके हृदय में ब्राह्मणों के प्रति श्रद्धा थी। वह सत्यवादी और उदार था।
In that village lived a rich robber, who knew the specialties of all the castes. He had devotion for the Brahmins in his heart. He was truthful and generous.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥