श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  12.168.25-26h 
शास्त्रनित्या जितक्रोधा बलवन्तो रणे सदा॥ २५॥
जन्मशीलगुणोपेता: संधेया: पुरुषोत्तमा:।
 
 
अनुवाद
जो प्रतिदिन शास्त्रों का स्वाध्याय करते हैं, क्रोध को वश में रखते हैं और युद्ध में सदैव बलवान रहते हैं। जो उत्तम कुल में उत्पन्न हुए हैं, गुणवान हैं और उत्तम गुणों वाले हैं, वे ही उत्तम पुरुष मित्र बनाने के योग्य हैं। ॥25 1/2॥
 
Those who study the scriptures daily, control their anger and are always strong in war. Those who are born in a noble family, are virtuous and have good qualities, only those noble men are worthy of making friends. ॥25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)