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mahabharat 12.167.9: इसलिए हमें अपने मन को वश में करके धर्म को अपना मुख्य उद्देश्य बनाना चाहिए और सभी प्राणियों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा हम अपने साथ चाहते हैं।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.167.9 
तस्माद् धर्मप्रधानेन भवितव्यं यतात्मना।
तथा च सर्वभूतेषु वर्तितव्यं यथात्मनि॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हमें अपने मन को वश में करके धर्म को अपना मुख्य उद्देश्य बनाना चाहिए और सभी प्राणियों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा हम अपने साथ चाहते हैं।॥9॥
 
Therefore, we must control our mind and make Dharma our prime objective and treat all creatures in the same way as we would like to be treated.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)