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mahabharat 12.167.48: मनुष्य कर्म से अप्राप्य वस्तुओं को प्राप्त नहीं कर सकता। जो सामर्थ्य है, वही घटित होता है; यह आप सभी को जानना चाहिए। मनुष्य तीनों लोकों से वंचित होने पर भी आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त कर लेता है; अतः मोक्ष प्राप्ति का गुप्त उपाय (ज्ञान) ही जगत का वास्तविक कल्याणकारी है।   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.167.48 
न कर्मणाऽऽप्नोत्यनवाप्यमर्थं
यद्भावि तद्वै भवतीति वित्त।
त्रिवर्गहीनोऽपि हि विन्दतेऽर्थं
तस्मादहो लोकहिताय गुह्यम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य कर्म से अप्राप्य वस्तुओं को प्राप्त नहीं कर सकता। जो सामर्थ्य है, वही घटित होता है; यह आप सभी को जानना चाहिए। मनुष्य तीनों लोकों से वंचित होने पर भी आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त कर लेता है; अतः मोक्ष प्राप्ति का गुप्त उपाय (ज्ञान) ही जगत का वास्तविक कल्याणकारी है।
 
Man cannot attain unattainable things through action. Whatever is capable, happens; you all should know this. Man attains the necessary things even if he is deprived of the three worlds; hence the secret method (knowledge) of attaining salvation is the real benefactor of the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)