Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.167.34: सभी प्राणियों में इच्छाएँ होती हैं। इनके अतिरिक्त कहीं भी इच्छारहित कोई प्राणी न तो कभी था और न ही भविष्य में होगा; अतः यह इच्छा ही तीनों लोकों का सार है। महाराज! धर्म और अर्थ भी इसी में स्थित हैं। 34.   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.167.34 
नास्ति नासीन्नाभविष्यद्‍भूतं कामात्मकात् परम्।
एतत् सारं महाराज धर्मार्थावत्र संस्थितौ॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
सभी प्राणियों में इच्छाएँ होती हैं। इनके अतिरिक्त कहीं भी इच्छारहित कोई प्राणी न तो कभी था और न ही भविष्य में होगा; अतः यह इच्छा ही तीनों लोकों का सार है। महाराज! धर्म और अर्थ भी इसी में स्थित हैं। 34.
 
All beings have desires. Apart from them, there is no being without desires anywhere, nor was there ever and nor will there be in the future; hence this desire is the essence of the three worlds. Maharaj! Dharma and Artha are also situated in this. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)