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mahabharat 12.167.33: अन्य पुरुष कामना से भरे हुए समुद्र में भी प्रवेश करते हैं। कामना के अनेक रूप हैं और सम्पूर्ण कार्य कामना से व्याप्त है ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.167.33 
समुद्रं वा विशन्त्यन्ये नरा: कामेन संयुता:।
कामो हि विविधाकार: सर्वं कामेन संततम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अन्य पुरुष कामना से भरे हुए समुद्र में भी प्रवेश करते हैं। कामना के अनेक रूप हैं और सम्पूर्ण कार्य कामना से व्याप्त है ॥33॥
 
Other men filled with desire even enter the ocean. Desire has various forms and the whole activity is pervaded by desire. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)