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mahabharat 12.167.28: वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! इतना कहकर नकुल और सहदेव चुप हो गये। तब भीमसेन इस प्रकार बोलने लगे॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.167.28 
वैशम्पायन उवाच
विरेमतुस्तु तद् वाक्यमुक्त्वा तावश्विनो:सुतौ।
भीमसेनस्तदा वाक्यमिदं वक्तुं प्रचक्रमे॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! इतना कहकर नकुल और सहदेव चुप हो गये। तब भीमसेन इस प्रकार बोलने लगे॥ 28॥
 
Vaishampayana says- Janamejaya! Having said this, Nakula and Sahadeva became silent. Then Bhimasena started speaking like this.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)