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वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् धर्म और अर्थ के ज्ञान में निपुण माद्री के पुत्र नकुल और सहदेव ने इस प्रकार अपने उत्तम विचार प्रस्तुत किए ॥ 21॥
Vaishmpayana says: O King! Thereafter, Nakula and Sahadeva, the sons of Madri, who were proficient in the knowledge of Dharma and Artha, presented their excellent views in this manner. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥