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mahabharat 12.167.2: लोग प्रायः धर्म, अर्थ और काम की ओर प्रवृत्त होते हैं। इन तीनों में कौन श्रेष्ठ है, कौन मध्यम है और कौन लघु है?'॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.167.2 
धर्मे चार्थे च कामे च लोकवृत्ति: समाहिता।
तेषां गरीयान् कतमो मध्यम: को लघुश्च क:॥ २॥
 
 
अनुवाद
लोग प्रायः धर्म, अर्थ और काम की ओर प्रवृत्त होते हैं। इन तीनों में कौन श्रेष्ठ है, कौन मध्यम है और कौन लघु है?'॥2॥
 
‘People usually tend towards Dharma, Artha and Kama. Which of these three is the best, which is medium and which is smallest?’॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)