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श्लोक  12.167.14 
अर्थस्यावयवावेतौ धर्मकामाविति श्रुति:।
अर्थसिद्धॺा विनिर्वृत्तावुभावेतौ भविष्यत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
श्रुतिका कहती है कि धर्म और काम, अर्थ के दो अंग हैं। अर्थ की प्राप्ति से दोनों की प्राप्ति भी हो जाएगी। 14.
 
Shrutika says that Dharma and Kama are two components of Artha. By achieving Artha, both of them will also be achieved. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)