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mahabharat 12.167.13: धनवान पुरुष अपने धन के द्वारा उत्तम धर्म का पालन कर सकता है और उन कामनाओं को प्राप्त कर सकता है जो उस पुरुष के लिए दुर्लभ हैं जिसने अपनी इन्द्रियों को वश में नहीं किया है ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.167.13 
विषयैरर्थवान् धर्ममाराधयितुमुत्तमम्।
कामं च चरितुं शक्तो दुष्प्रापमकृतात्मभि:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
धनवान पुरुष अपने धन के द्वारा उत्तम धर्म का पालन कर सकता है और उन कामनाओं को प्राप्त कर सकता है जो उस पुरुष के लिए दुर्लभ हैं जिसने अपनी इन्द्रियों को वश में नहीं किया है ॥13॥
 
A wealthy man can by means of his wealth follow the best religion and achieve desires which are rare for a man who has not controlled his senses. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)