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mahabharat 12.167.10: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! विदुरजी के यह कहने के बाद अर्थशास्त्र के ज्ञाता तथा धर्म और अर्थशास्त्र के मर्म को जानने वाले अर्जुन ने युधिष्ठिर से अनुमति लेकर कहा -   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.167.10 
वैशम्पायन उवाच
समाप्तवचने तस्मिन्नर्थशास्त्रविशारद:।
पार्थो धर्मार्थतत्त्वज्ञो जगौ वाक्यं प्रचोदित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! विदुरजी के यह कहने के बाद अर्थशास्त्र के ज्ञाता तथा धर्म और अर्थशास्त्र के मर्म को जानने वाले अर्जुन ने युधिष्ठिर से अनुमति लेकर कहा -
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! After Vidurji finished speaking, Arjuna, an expert in economics and knowing the essence of religion and economics, after taking permission from Yudhishthira, said:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)