| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन » श्लोक 84 |
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| | | | श्लोक 12.166.84  | असिर्विशसन: खड्गस्तीक्ष्णधारो दुरासद:।
श्रीगर्भो विजयश्चैव धर्मपालस्तथैव च॥ ८४॥ | | | | | | अनुवाद | | 1.असि, 2. विशन, 3. खड्ग, 4. तीव्र धार, 5. दुरसाद, 6. श्रीगर्भ, 7. विजय और 8. धर्मपाल : ये आठ नाम हैं। 84॥ | | | | 1.Aasi, 2. Wishan, 3. Khadga, 4. Sharp edge, 5. Durasad, 6. Srigarbha, 7. Vijay and 8. Dharampal: These are those eight names. 84॥ | | ✨ ai-generated | | |
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