vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन
»
श्लोक 82
श्लोक
12.166.82
कृत्तिकास्तस्य नक्षत्रमसेरग्निश्च दैवतम्।
रोहिणी गोत्रमस्याथ रुद्रश्च गुरुरुत्तम:॥ ८२॥
अनुवाद
उस 'असि' का नक्षत्र कृत्तिका है, देवता अग्नि हैं, गोत्र रोहिणी है और श्रेष्ठ गुरु रुद्रदेव हैं ॥82॥
The constellation of that 'Asi' is Krittika, the deity is Agni, the Gotra is Rohini and the best guru is Rudradev. 82॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd