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mahabharat 12.166.81: भारद्वाज वंशी द्रोणाचार्य ने ऋषि परशुराम से तलवारबाजी की कला सीखी और द्रोणाचार्य से कृपाचार्य ने कृपाचार्य से तलवारबाजी सीखी। फिर आपने अपने भाइयों के साथ कृपाचार्य से उत्तम तलवारबाजी सीखी। 81.   |   mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  12.166.81 
पृषदश्वाद् भरद्वाजो द्रोणस्तस्मात् कृपस्तत:।
ततस्त्वं भ्रातृभि: सार्धं परमासिमवाप्तवान्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाज वंशी द्रोणाचार्य ने ऋषि परशुराम से तलवारबाजी की कला सीखी और द्रोणाचार्य से कृपाचार्य ने कृपाचार्य से तलवारबाजी सीखी। फिर आपने अपने भाइयों के साथ कृपाचार्य से उत्तम तलवारबाजी सीखी। 81.
 
Bharadvaja descendant Dronacharya learnt the art of swordsmanship from Sage Parasurama and from Dronacharya Krupacharya, Krupacharya. Then you along with your brothers learnt the art of the excellent sword from Krupacharya. 81.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)