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mahabharat 12.166.77-80: धुन्धुमार से काम्बोजन, काम्बोज से मुचुकुन्दने, मुचुकुन्द से मरुत्तने, मरुत्त से रैवतने, रैवत से युवनाश्वने, युवनाश्व से इक्ष्वाकुवंशी रघुणे, रघु से गौरवशाली हरिनाश्वने, हरिनाश्व से शुनकने, शुनक से धर्मात्मा उशीनरे, उशीनर से युदवंशी भोजने आये। यदुवंशियों में शिबिने, शिबिस से प्रतर्दन, प्रतर्दन से अष्टकण और अष्टक से पार्श्वदश्व को वह तलवार मिली। 77-80॥   |   mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 77-80
 
 
श्लोक  12.166.77-80 
धुन्धुमाराच्च काम्बोजो मुचुकुन्दस्ततोऽलभत्।
मुचुकुन्दान्मरुत्तश्च मरुत्तादपि रैवत:॥ ७७॥
रैवताद् युवनाश्वश्च युवनाश्वात्ततो रघु:।
इक्ष्वाकुवंशजस्तस्माद्धरिणाश्व: प्रतापवान्॥ ७८॥
हरिणाश्वादसिं लेभे शुनक: शुनकादपि।
उशीनरो वै धर्मात्मा तस्माद् भोज: स यादव:॥ ७९॥
यदुभ्यश्च शिबिर्लेभे शिबेश्चापि प्रतर्दन:।
प्रतर्दनादष्टकश्च पृषदश्वोऽष्टकादपि॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
धुन्धुमार से काम्बोजन, काम्बोज से मुचुकुन्दने, मुचुकुन्द से मरुत्तने, मरुत्त से रैवतने, रैवत से युवनाश्वने, युवनाश्व से इक्ष्वाकुवंशी रघुणे, रघु से गौरवशाली हरिनाश्वने, हरिनाश्व से शुनकने, शुनक से धर्मात्मा उशीनरे, उशीनर से युदवंशी भोजने आये। यदुवंशियों में शिबिने, शिबिस से प्रतर्दन, प्रतर्दन से अष्टकण और अष्टक से पार्श्वदश्व को वह तलवार मिली। 77-80॥
 
From Dhundhumara came Kambojan, from Kamboj came Muchukundne, from Muchukund came Maruttane, from Marutta came Raivatne, from Raivat came Yuvnaashvane, from Yuvnaashva came Ikshvakuvanshi Raghune, from Raghu came glorious Harinashvane, from Harinashva came Shunakne, from Shunaka came Dharmatma Ushinare, from Ushinara came Yudvanshi Bhojane, from Yaduvanshis came Shibine, From Shibis, Pratardana, from Pratardana, Ashtakane and from Ashtaka, Parshadashva got that sword. 77-80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)