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श्लोक 12.166.72-73  |
असेरेवं प्रमाणानि परिपाल्य व्यतिक्रमात्।
स विसृज्याथ पुत्रं स्वं प्रजानामधिपं तत:॥ ७२॥
मनु: प्रजानां रक्षार्थं क्षुपाय प्रददावसिम्।
क्षुपाज्जग्राह चेक्ष्वाकुरिक्ष्वाकोश्च पुरूरवा:॥ ७३॥ |
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| अनुवाद |
| जब प्रजा द्वारा धर्म का उल्लंघन हो रहा हो, तब खड्ग द्वारा प्रमाणित इन दण्डों का यथोचित प्रयोग करके धर्म की रक्षा करनी चाहिए ।' ऐसा कहकर लोकपालों ने अपने पुत्र प्रजापालक मनु को विदा किया । तत्पश्चात् मनु ने प्रजा की रक्षा के लिए वह तलवार क्षुप को दे दी । क्षुप से इक्ष्वाकु और इक्ष्वाकु से पुरुरवान् ने वह तलवार स्वीकार की । 72-73॥ |
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| 'When Dharma is violated by the people, then the Dharma should be protected by using these punishments which are certified by Khadga appropriately.' Saying this, the Lokpalas bid farewell to their son Prajapalak Manu. After that, Manu gave that sword to Khushup for the protection of the people. From Kshupa Ikshvaku and from Ikshvaku Pururvan accepted that sword. 72-73॥ |
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