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mahabharat 12.166.63-64h: दैत्यों का संहार करके तथा संसार में धर्म की प्रभुता स्थापित करके भगवान रुद्रदेव ने वह भयंकर रूप त्याग दिया। तब वे कल्याणकारी शिवजी अपने मंगलमय रूप से विभूषित होने लगे॥63 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  12.166.63-64h 
स रुद्रो दानवान् हत्वा कृत्वा धर्मोत्तरं जगत‍् ॥ ६३॥
रौद्रं रूपमथोत्क्षिप्य चक्रे रूपं शिवं शिव:।
 
 
अनुवाद
दैत्यों का संहार करके तथा संसार में धर्म की प्रभुता स्थापित करके भगवान रुद्रदेव ने वह भयंकर रूप त्याग दिया। तब वे कल्याणकारी शिवजी अपने मंगलमय रूप से विभूषित होने लगे॥63 1/2॥
 
After killing the demons and establishing the supremacy of religion in the world, Lord Rudradev abandoned that fierce form. Then that benevolent Shiva started adorning himself with his auspicious form. 63 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)