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mahabharat 12.166.56-57h: वे सब राक्षस तीव्र गति से पैर उठाने के कारण विचित्र गति से चलने वाले एकमात्र खड्गधारी रुद्रदेव को हजारों राक्षसों के समान समझने लगे ॥56 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  12.166.56-57h 
चित्रं शीघ्रपदत्वाच्च चरन्तमसिपाणिनम्॥ ५६॥
तमेकमसुरा: सर्वे सहस्रमिति मेनिरे।
 
 
अनुवाद
वे सब राक्षस तीव्र गति से पैर उठाने के कारण विचित्र गति से चलने वाले एकमात्र खड्गधारी रुद्रदेव को हजारों राक्षसों के समान समझने लगे ॥56 1/2॥
 
All those demons started thinking of Rudradev, the only sword-wielding Rudradev, who was moving at a strange speed due to his quick lifting of his feet, as equal to thousands of demons. 56 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)