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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  12.166.55-56h 
ततस्तु दानवानीकं सम्प्रणेतारमच्युतम्॥ ५५॥
रुद्रं दृष्ट्वा बलोद्भूतं प्रमुमोह चचाल च।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर जब दैत्यों के समूह ने देखा कि देवताओं के सेनापति का कर्तव्य सँभालने वाले भयंकर एवं पराक्रमी रुद्रदेव युद्ध से पीछे नहीं हट रहे हैं, तब वे मोहित और विरक्त हो गए ॥55 1/2॥
 
After that, when the group of demons saw that Rudradev, the fierce and powerful Rudradev, who was handling the duty of the commander of the gods, was not retreating from the war, then they became fascinated and disoriented. 55 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)