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mahabharat 12.166.52-53h: भरतनन्दन! उस समय रुद्रदेव का रूप अत्यन्त भयंकर गर्जना और महान् शब्द करता हुआ प्रकट हुआ। 52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  12.166.52-53h 
तस्य नादं विनदतो महाहासं च मुञ्चत:॥ ५२॥
बभौ प्रतिभयं रूपं तदा रुद्रस्य भारत।
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! उस समय रुद्रदेव का रूप अत्यन्त भयंकर गर्जना और महान् शब्द करता हुआ प्रकट हुआ। 52 1/2॥
 
Bharatnandan! At that time, the form of Rudradev appeared very fierce, roaring loudly and making great noises. 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)