Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.166.50-52h: तत्पश्चात् भगदेवता के नेत्रों को नष्ट करने वाले महाबली शूलपाणि भगवान महादेव अपने हाथों में काल और अग्नि के समान तेजस्वी तलवार तथा बिजली से युक्त मेघ के समान चमकने वाली त्रिकोनाकार ढाल धारण करके भिन्न-भिन्न मार्गों से विचरण करने लगे; और युद्ध करने की इच्छा से आकाश में तलवार घुमाने लगे॥50-51 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् भगदेवता के नेत्रों को नष्ट करने वाले महाबली शूलपाणि भगवान महादेव अपने हाथों में काल और अग्नि के समान तेजस्वी तलवार तथा बिजली से युक्त मेघ के समान चमकने वाली त्रिकोनाकार ढाल धारण करके भिन्न-भिन्न मार्गों से विचरण करने लगे; और युद्ध करने की इच्छा से आकाश में तलवार घुमाने लगे॥50-51 1/2॥
Thereafter, Lord Mahadev, the mighty Shulpani, who destroyed the eyes of Bhagdevata, started wandering through different paths holding in his hands a sword as bright as time and fire and a three-cornered shield as bright as a cloud with lightning; And with the desire to fight, he started swinging the sword in the sky. 50-51 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥