Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.166.43-44h: मैंने इस भूत की कल्पना की थी। यह असि नामक एक शक्तिशाली अस्त्र है। मैंने इसे सम्पूर्ण जगत की रक्षा के लिए तथा देवताओं के शत्रु दैत्यों का संहार करने के लिए प्रकट किया है। ॥43 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मयैवं चिन्तितं भूतमसिर्नामैष वीर्यवान्॥ ४३॥
रक्षणार्थाय लोकस्य वधाय च सुरद्विषाम्।
अनुवाद
मैंने इस भूत की कल्पना की थी। यह असि नामक एक शक्तिशाली अस्त्र है। मैंने इसे सम्पूर्ण जगत की रक्षा के लिए तथा देवताओं के शत्रु दैत्यों का संहार करने के लिए प्रकट किया है। ॥43 1/2॥
'I had imagined this ghost. This is a powerful weapon named Asi. I have manifested it to protect the whole world and to kill the demons who are enemies of the gods. ॥ 43 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥