Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.166.37-38: उस समय वहाँ एक बहुत ही भयानक घटना घटी, जिसके बारे में मैंने ऋषियों से सुना है। कहते हैं कि जैसे तारों के उदय होने पर निर्मल आकाश में चन्द्रमा उदय होता है, उसी प्रकार यज्ञवेदी में एक भयानक प्रेत प्रकट होकर अग्नि को इधर-उधर बिखेरता हुआ प्रकट हुआ। | mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र घोरतमं वृत्तमृषीणां मे परिश्रुतम्॥ ३७॥
चन्द्रमा विमलं व्योम यथाभ्युदिततारकम्।
विकीर्याग्निं तथा भूतमुत्थितं श्रूयते तदा॥ ३८॥
अनुवाद
उस समय वहाँ एक बहुत ही भयानक घटना घटी, जिसके बारे में मैंने ऋषियों से सुना है। कहते हैं कि जैसे तारों के उदय होने पर निर्मल आकाश में चन्द्रमा उदय होता है, उसी प्रकार यज्ञवेदी में एक भयानक प्रेत प्रकट होकर अग्नि को इधर-उधर बिखेरता हुआ प्रकट हुआ।
At that time a very dreadful event occurred there, which I have heard from the sages. It is said that just as the moon rises in the clear sky when the stars rise, in the same way a dreadful ghost appeared in the sacrificial altar scattering the fire here and there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥