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mahabharat 12.166.33: हे नकुल! जहाँ वृक्ष और वन पुष्पों से परिपूर्ण थे, उस महान पर्वत शिखर पर श्रेष्ठ ब्रह्माजी सम्पूर्ण जगत् का कार्य सम्पन्न करने के लिए ठहरे हुए थे॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.166.33 
तस्मिन् गिरिवरे पुत्र पुष्पितद्रुमकानने।
तस्थौ स विबुधश्रेष्ठो ब्रह्मा लोकार्थसिद्धये॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे नकुल! जहाँ वृक्ष और वन पुष्पों से परिपूर्ण थे, उस महान पर्वत शिखर पर श्रेष्ठ ब्रह्माजी सम्पूर्ण जगत् का कार्य सम्पन्न करने के लिए ठहरे हुए थे॥33॥
 
Son Nakul! Where the trees and forests were full of flowers, the best Brahmaji stopped on that great mountain peak to complete the work of the entire world. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)