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mahabharat 12.166.3: हे राजन! यदि धनुष टूट भी जाए और घोड़े भी नष्ट हो जाएं, तो भी युद्धभूमि में तलवार से अपने शरीर की रक्षा भली-भांति की जा सकती है।   |   mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.166.3 
विशीर्णे कार्मुके राजन् प्रक्षीणेषु च वाजिषु।
खड्गेन शक्यते युद्धे साध्वात्मा परिरक्षितुम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यदि धनुष टूट भी जाए और घोड़े भी नष्ट हो जाएं, तो भी युद्धभूमि में तलवार से अपने शरीर की रक्षा भली-भांति की जा सकती है।
 
O King! Even if the bow breaks and the horses get destroyed, one can still protect his body well with the sword on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)