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mahabharat 12.166.29: वे सभी राक्षस कहते थे कि ‘हम और देवता एक ही जाति के हैं; अतः हम देवताओं के समान हैं।’ इस प्रकार अपनी जाति का धर्म अपनाकर राक्षस ऋषियों से प्रतिस्पर्धा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.166.29 
सर्वे तुल्याभिजातीया यथा देवास्तथा वयम्।
इत्येवं धर्ममास्थाय स्पर्धमाना: सुरर्षिभि:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वे सभी राक्षस कहते थे कि ‘हम और देवता एक ही जाति के हैं; अतः हम देवताओं के समान हैं।’ इस प्रकार अपनी जाति का धर्म अपनाकर राक्षस ऋषियों से प्रतिस्पर्धा करने लगे।
 
All those demons used to say that 'We and the gods belong to the same caste; hence we are like the gods.' Thus, by adopting the religion of their caste, the demons started competing with the sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)