Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.166.27-28: हिरण्यकशिपु, हिरण्याक्ष, विरोचन, शम्बर, विप्रचित्ति, विराध, नमुचि और बलि - ये तथा अन्य अनेक दैत्य और राक्षस अपने समूह सहित धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करके अधर्म करने का दृढ़ निश्चय करके आनन्द और प्रसन्नतापूर्वक अपना जीवन व्यतीत करने लगे ॥27-28॥ | mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हिरण्यकशिपु, हिरण्याक्ष, विरोचन, शम्बर, विप्रचित्ति, विराध, नमुचि और बलि - ये तथा अन्य अनेक दैत्य और राक्षस अपने समूह सहित धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करके अधर्म करने का दृढ़ निश्चय करके आनन्द और प्रसन्नतापूर्वक अपना जीवन व्यतीत करने लगे ॥27-28॥
Hiranyakshipu, Hiranyaksha, Virochana, Shambar, Viprachitti, Viradha, Namuchi and Bali - these and many other demons and demons along with their group, with the firm resolve to commit unrighteousness by violating the limits of religion, started living their lives in joy and happiness. 27-28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥