Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.166.23-25: भृगु, अत्रि और अंगिरा - ये सिद्ध ऋषि, कश्यपगण, तपस्वी, वसिष्ठ, गौतम, अगस्त्य, देवर्षि नारद, पर्वत, वालखिल्य ऋषि, प्रभास, सिकट, घृतप (घी पीकर रहने वाले), सोमपा (सोमपा पीने वाले), वायव्य (वायु पीकर रहने वाले), मरीचिप (सूर्य की किरणों को पीने वाले) तथा वैश्वानर और आकृष्ट (अन्न से जीविका चलाने वाले, बिना जोते-बोए उत्पन्न हुए), हंसमुनि (मुनि), अग्नि से उत्पन्न ऋषि, वानप्रस्थ और पृश्निगण - ये सभी महात्मा ब्रह्माजी की आज्ञा से सनातन धर्म का पालन करने लगे ॥23-25॥ | mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भृगु, अत्रि और अंगिरा - ये सिद्ध ऋषि, कश्यपगण, तपस्वी, वसिष्ठ, गौतम, अगस्त्य, देवर्षि नारद, पर्वत, वालखिल्य ऋषि, प्रभास, सिकट, घृतप (घी पीकर रहने वाले), सोमपा (सोमपा पीने वाले), वायव्य (वायु पीकर रहने वाले), मरीचिप (सूर्य की किरणों को पीने वाले) तथा वैश्वानर और आकृष्ट (अन्न से जीविका चलाने वाले, बिना जोते-बोए उत्पन्न हुए), हंसमुनि (मुनि), अग्नि से उत्पन्न ऋषि, वानप्रस्थ और पृश्निगण - ये सभी महात्मा ब्रह्माजी की आज्ञा से सनातन धर्म का पालन करने लगे ॥23-25॥
Bhrigu, Atri and Angira - these Siddha sages, Kashyapagan, rich in penance, Vasistha, Gautam, Agastya, Devarshi Narad, Parvat, Valakhilya Rishi, Prabhas, Sikat, Ghritap (those who live by drinking ghee), Sompa (those who drink Sompa), Vayavya (those who live by drinking air), Marichip (those who drink the rays of the sun) and Vaishwanar and Akrishta. (Those who earn their living from food, born without tilling or sowing), Hansmuni (saints), Rishis born from fire, Vanaprastha and Prishnigana – all of them started following Sanatan Dharma under the orders of Mahatma Brahmaji. 23-25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥