श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.166.2 
नकुल उवाच
धनु: प्रहरणं श्रेष्ठमतीवात्र पितामह।
मतस्तु मम धर्मज्ञ खड्ग एव सुसंशित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
नकुल बोले - धर्मात्मा पितामह! यद्यपि इस संसार में धनुष ही सर्वश्रेष्ठ अस्त्र माना गया है, तथापि मुझे तो अत्यन्त तीक्ष्ण तलवार ही प्रिय है॥2॥
 
Nakul said – Righteous grandfather! Although in this world the bow is considered to be the best weapon, yet to me I prefer only a very sharp sword. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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