| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन » श्लोक 18-20 |
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| | | | श्लोक 12.166.18-20  | ताभ्यो विश्वानि भूतानि देवा: पितृगणास्तथा।
गन्धर्वाप्सरसश्चैव रक्षांसि विविधानि च॥ १८॥
पतत्रिमृगमीनाश्च प्लवङ्गाश्च महोरगा:।
तथा पक्षिगणा: सर्वे जलस्थलविचारिण:॥ १९॥
उद्भिद: स्वेदजाश्चैव साण्डजाश्च जरायुजा:।
जज्ञे तात जगत् सर्वं तथा स्थावरजङ्गमम्॥ २०॥ | | | | | | अनुवाद | | उन कन्याओं से समस्त जीव-जंतु, देवता, पितर, गन्धर्व, अप्सराएँ, नाना प्रकार के राक्षस, पशु, पक्षी, मत्स्य, वानर, बड़े-बड़े सर्प, जल और स्थल में विचरण करने वाले सब प्रकार के पक्षी, उद्भिज्ज, स्वेदज, अण्डज और जरायुज जीव उत्पन्न हुए। तत्! इस प्रकार सम्पूर्ण स्थावर-जंगम जगत् उत्पन्न हुआ। 18-20॥ | | | | From those girls were born all the living beings, gods, ancestors, Gandharvas, Apsaras, various types of demons, animals, birds, fish, monkeys, big snakes, all types of birds roaming in water and land, Udbhijja, Swedaj, Andaj and Jaryuj creatures. Tat! In this way the entire movable and immovable world was born. 18-20॥ | | ✨ ai-generated | | |
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