| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन » श्लोक 14 |
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| | | | श्लोक 12.166.14  | नभ: सचन्द्रतारं च नक्षत्राणि ग्रहांस्तथा।
संवत्सरानृतून् मासान् पक्षानथ लवान् क्षणान्॥ १४॥ | | | | | | अनुवाद | | वे ही आकाश, चन्द्रमा और तारे, नक्षत्र, ग्रह, वर्ष, ऋतुएँ, मास, पक्ष, ऋतुएँ और क्षण बनाने वाले हैं ॥14॥ | | | | He is the one who created the sky, the moon and the stars, the constellations, the planets, the year, the seasons, the months, fortnights, the seasons and the moments. ॥14॥ | | ✨ ai-generated | | |
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