श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.166.13 
सोऽसृजद् वातमग्निं च भास्करं चापि वीर्यवान्।
आकाशमसृजच्चोर्ध्वमधो भूमिं च नैर्ऋतीम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उन महाबली पितामह ने वायु, अग्नि और सूर्य की सृष्टि की, तथा आकाश, ऊपर, नीचे, भूमि और दैत्यों के समूह की भी सृष्टि की ॥13॥
 
That mighty patriarch created air, fire and sun. He also created the sky, above, below, land and the group of demons. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)