श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.166.11 
सलिलैकार्णवं तात पुरा सर्वमभूदिदम्।
निष्प्रकम्पमनाकाशमनिर्देश्यमहीतलम् ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! पूर्वकाल में यह सम्पूर्ण जगत् जल का सागर था। उस समय इसमें कोई कम्पन नहीं था। आकाश का नामोनिशान नहीं था। पृथ्वी का कहीं नामोनिशान नहीं था॥ 11॥
 
Father! In the past, this entire world was just an ocean of water. At that time, there was no vibration in it. There was no trace of the sky. There was no mention of the earth anywhere.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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