श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.166.1 
वैशम्पायन उवाच
कथान्तरमथासाद्य खड्गयुद्धविशारद:।
नकुल: शरतल्पस्थमिदमाह पितामहम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! कथा के अन्त में खड्गयुद्ध में निपुण नकुल ने बाणों की शय्या पर सो रहे अपने पितामह भीष्म से यह प्रश्न पूछा था॥1॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! At the end of the story, Nakula, the expert in Khadga Yudha, asked this question to his grandfather Bhishma who was sleeping on the arrow bed. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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