श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 165: नाना प्रकारके पापों और उनके प्रायश्चित्तोंका वर्णन  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  12.165.71 
अमानुषीषु गोवर्ज्यमनावृष्टिर्न दुष्यति।
अधिष्ठात्रवमन्तारं पशूनां पुरुषं विदु:॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
यदि गाय के अतिरिक्त अन्य किसी पशु पर अनजाने में हिंसा हो जाए तो वह पाप नहीं माना जाता, क्योंकि मनुष्य पशुओं का रक्षक और पालनकर्ता माना गया है ॥ 71॥
 
If violence is inadvertently committed against any animal other than cow, it is not considered a sin, because man is considered the protector and caretaker of animals. ॥ 71॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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