Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.163.5: नरश्रेष्ठ! इनके कारण ही सभी को दुःख प्राप्त होता है, इनकी प्रेरणा से ही मनुष्य में पाप करने की प्रवृत्ति होती है। प्रत्येक मनुष्य को इसका सदैव ध्यान रखना चाहिए। 5॥ | mahabharat अध्याय 12.163: काम, क्रोध आदि तेरह दोषोंका निरूपण और उनके नाशका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरश्रेष्ठ! इनके कारण ही सभी को दुःख प्राप्त होता है, इनकी प्रेरणा से ही मनुष्य में पाप करने की प्रवृत्ति होती है। प्रत्येक मनुष्य को इसका सदैव ध्यान रखना चाहिए। 5॥
Narashrestha! Due to these, everyone gets sorrow, due to their inspiration man has a tendency to commit sins. Every man should always be aware of this. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥