श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 162: सत्यके लक्षण, स्वरूप और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  12.162.8-9 
सत्यं च समता चैव दमश्चैव न संशय:।
अमात्सर्यं क्षमा चैव ह्रीस्तितिक्षानसूयता॥ ८॥
त्यागो ध्यानमथार्यत्वं धृतिश्च सततं स्थिरा।
अहिंसा चैव राजेन्द्र सत्याकारास्त्रयोदश॥ ९॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! सत्य, समता, साहस, स्वार्थ का अभाव, क्षमा, लज्जा, तितिक्षा (सहिष्णुता), असूया, त्याग, ईश्वर का ध्यान, आर्य (उत्तम आचरण), निरन्तर धृति (धैर्य) और अहिंसा - ये तेरह सत्यों के स्वरूप हैं, इसमें संशय नहीं है। 8-9॥
 
Rajendra! Truth, equanimity, courage, absence of selfishness, forgiveness, shyness, Titiksha (tolerance), unsuya, renunciation, meditation on God, Arya (noble conduct), constant Dhriti (patience) and non-violence - these are the forms of thirteen truths, there is no doubt about it. 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)