श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 162: सत्यके लक्षण, स्वरूप और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.162.6 
आचारानिह सत्यस्य यथावदनुपूर्वश:।
लक्षणं च प्रवक्ष्यामि सत्यस्येह यथाक्रमम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अब मैं तुम्हें क्रमशः यथार्थ आचरण और सत्य के लक्षण बताऊंगा ॥6॥
 
Now I will gradually tell you the exact conduct and characteristics of truth. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)