vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 162: सत्यके लक्षण, स्वरूप और महिमाका वर्णन
»
श्लोक 6
श्लोक
12.162.6
आचारानिह सत्यस्य यथावदनुपूर्वश:।
लक्षणं च प्रवक्ष्यामि सत्यस्येह यथाक्रमम्॥ ६॥
अनुवाद
अब मैं तुम्हें क्रमशः यथार्थ आचरण और सत्य के लक्षण बताऊंगा ॥6॥
Now I will gradually tell you the exact conduct and characteristics of truth. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×