श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 162: सत्यके लक्षण, स्वरूप और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.162.26 
अश्वमेधसहस्रं च सत्यं च तुलया धृतम्।
अश्वमेधसहस्राद्धि सत्यमेव विशिष्यते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदि तराजू के एक पलड़े पर एक हजार अश्वमेध यज्ञ रखे जाएँ और दूसरी ओर एकमात्र सत्य को रखा जाए, तो सत्य का पलड़ा हजार अश्वमेध यज्ञों से भारी होगा ॥ 26॥
 
If a thousand Ashwamedha Yagyas are put on one side of the scale and on the other side the only truth is placed, then the scale of truth will be heavier than the thousand Ashwamedha Yagyas.॥ 26॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि सत्यप्रशंसायां द्विषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें सत्यकी प्रशंसाविषयक एक सौ बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)