श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 162: सत्यके लक्षण, स्वरूप और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.162.19 
धृतिर्नाम सुखे दु:खे यथा नाप्नोति विक्रियाम्।
तां भजेत सदा प्राज्ञो य इच्छेद् भूतिमात्मन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सुख-दुःख में भी शांत रहने की क्षमता ही धैर्य है। उन्नति चाहने वाले बुद्धिमान व्यक्ति को सदैव धैर्य का अभ्यास करना चाहिए।॥19॥
 
Patience is the ability to remain calm when you experience happiness or sadness. A wise man who wants to progress should always practice patience.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)