श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 162: सत्यके लक्षण, स्वरूप और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.162.13 
अमात्सर्यं बुधा: प्राहुर्दाने धर्मे च संयम:।
अवस्थितेन नित्यं च सत्येनामत्सरी भवेत् ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
दान-पुण्य और धर्म-कर्म करते समय मन पर संयम रखने का अर्थ है, इस विषय में दूसरों से ईर्ष्या न करना। विद्वान लोग इसे 'ईर्ष्या का अभाव' कहते हैं। सदैव सत्य का पालन करने से ही मनुष्य ईर्ष्या से मुक्त हो सकता है।॥13॥
 
Keeping control over the mind while doing charity and religious deeds means not being jealous of others in this matter. Learned people call this 'absence of jealousy'. Only by always following the truth can a man be free from jealousy.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)