श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 162: सत्यके लक्षण, स्वरूप और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.162.1 
युधिष्ठिर उवाच
सत्यं धर्मं प्रशंसन्ति विप्रर्षिपितृदेवता:।
सत्यमिच्छाम्यहं श्रोतुं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! ब्राह्मण, ऋषि, पितर और देवता - सभी सत्यभाषण धर्म की प्रशंसा करते हैं; अतः अब मैं सुनना चाहता हूँ कि सत्य क्या है। कृपया मुझे बताइए॥1॥
 
Yudhishthira asked - Grandfather! Brahmins, sages, ancestors and gods - all praise the religion of speaking the truth; so now I want to hear what the truth is. Please tell me.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)