ये सभी विविध इच्छित फल, जो ऊपर बताए गए हैं, तपस्या से सदैव प्राप्त होते हैं। तपस्या से मनुष्य निश्चय ही देवत्व भी प्राप्त कर सकता है॥13॥
All these various desired fruits which have been mentioned above are always attainable through austerity. Through austerity one can certainly attain divinity also.॥ 13॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि तप:प्रशंसायामेकषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें तपस्याकी प्रशंसाविषयक एक सौ इकसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥