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mahabharat 12.161.1: भीष्म बोले, "हे राजन! इस सम्पूर्ण जगत का मूल कारण तप है, ऐसा विद्वान पुरुष कहते हैं। जिसने तप नहीं किया है, वह मूर्ख अपने शुभ कर्मों का फल नहीं पाता है॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.161: तपकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 161: तपकी महिमा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.161.1 
भीष्म उवाच
सर्वमेतत् तपोमूलं कवय: परिचक्षते।
न ह्यतप्ततपा मूढ: क्रियाफलमवाप्नुते॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजन! इस सम्पूर्ण जगत का मूल कारण तप है, ऐसा विद्वान पुरुष कहते हैं। जिसने तप नहीं किया है, वह मूर्ख अपने शुभ कर्मों का फल नहीं पाता है॥1॥
 
Bhishma said, "O King! The root cause of this entire universe is penance, so say the learned men. The fool who has not performed penance, does not get the fruits of his good deeds. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)