श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.160.9 
दमस्तेजो वर्धयति पवित्रं च दम: परम्।
विपाप्मा तेजसा युक्त: पुरुषो विन्दते महत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
संयम से तेज बढ़ता है; संयम परम पवित्र साधन है; संयम के द्वारा पापों से मुक्त होने वाला तेजस्वी पुरुष परम पद को प्राप्त होता है ॥9॥
 
Control increases one's brilliance; control is the most sacred means; the radiant man who becomes free from sins through control, attains the supreme position. ॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)