श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 160: मन और इन्द्रियोंके संयमरूप दमका माहात्म्य  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.160.8 
दमात् तस्य क्रियासिद्धिर्यथावदुपलभ्यते।
दमो दानं तथा यज्ञानधीतं चातिवर्तते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह अपने अच्छे कर्मों में इच्छित सफलता प्राप्त करने के लिए श्वास लेता है। उसके लिए श्वास दान, यज्ञ और स्वाध्याय से भी श्रेष्ठ है। ॥8॥
 
It is through his breath that he achieves the desired success in his good deeds. For him, breath is better than charity, sacrifices and self-study. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)